About Me

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Raushan Jha

नमस्कार...

 

       हमें  जीवनभर  अपने  कर्मों  के  प्रति  प्रयत्नशील  होना  चाहिए। क्योकि  हमारे  वश  में  सिर्फ  हमारे  कर्म  हैं, उनका  परिणाम  क्या  होगा  ये  हम  कभी  नहीं  बता  सकते। " श्रीमद भगवदगीतामें  भी  भगवान  श्री कृष्ण  ने  कहा  है - "कर्म  करो  फल  की  चिंता  मत  करो ..."  हम  सिर्फ  अपना  कर्म  पूरी  तन्मयता  से  कर  सकते  हैं, उसका  परिणाम  तो  उस  त्रिलोकधारी, सर्व-व्यापी  परमात्मा  के  हाथों में  हैं।

 

        अतः  ये  website  मेरे  प्रयत्नों  का  'अगला  अध्याय',  आप  सभी  के  सामने  बिना  परिणाम  की  चिंता  या  आशा  किये, पूरी  क्षमता  के  साथ  कार्यान्वित करने  की  कोशिश  कर  रहा  हूँ।  बस  आप  सभी  के  परामर्शों  की  आशा  अवश्य  करता  रहूँगा।

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क्रांत स्वर आह्लाद का 1

August 7, 2020

                अपनी पहली कविता आप सभी के सामने इस वेबसाइट  पर  प्रस्तुत कर रहा हूँ।  आशा करता हूँ आप सभी को यह रचना पसंद आएगी। आप सभी की प्रसंसा व् आलोचना हेतु मैं हमेशा अग्रसर हूँ।            

                 यह कविता एक व्यक्ति के विभिन्न मनोवृतियों को प्रदर्शित करता है। हम अपने जीवन में, अपनी ही मनोवृतियों से हारते रहते है। बस जरुरत है उनके पार निकल कर बस अपने कर्मो पर अनवरत बने रहने की।  अगर हम अपने कर्मों पर अडिग रहते है फिर हमारी सफलता की उड़ान हमारी महत्वाकांक्षाओं की सीमाओं से भी परे चली जाती है।